जीवन को बहनें दो उसे घसीटो नहीं , वह तो प्रभु का प्रसाद है , उसे प्यार से स्वीकारो /
आना - जाना , सुख - दुःख , नरम - गरम , लगाव - विलगाव यह द्वैत्य का आलम तो ऐसा ही रहेगा लेकिन तुम इसके परे पहुँच कर उसे जरुर देख सकता है जो इन सब का श्रोत है /
==== ओम् =======